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संयुग्म अधिकार याचिका की बहाली

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत एक पति या पत्नी द्वारा वैवाहिक अधिकारों की बहाली याचिका दायर की जाती है, जिसके पति या पत्नी ने बिना किसी उचित बहाने के वैवाहिक घर छोड़ दिया हो।

प्रारूपः

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IN THE [court_name] PETITION NO. ________ OF 20____ IN THE MATTER OF: [petitioner_name] [petitioner_address] ... PETITIONER VERSUS [respondent_name] [respondent_address] ... RESPONDENT PETITION UNDER SECTION 9 OF THE HINDU MARRIAGE ACT, 1955 FOR RESTITUTION OF CONJUGAL RIGHTS MOST RESPECTFULLY SHOWETH: 1. That the marriage between the Petitioner and the Respondent was solemnised on [marriage_date] according to Hindu rites and ceremonies, and the said marriage is valid and subsisting. Place of marriage: [marriage_place] 2. That after the marriage the parties lived together and cohabited as husband and wife. 3. FACTS [facts] 4. That the Respondent has, with effect from [withdrawal_date], withdrawn from the society of the Petitioner without any reasonable excuse or lawful justification. 5. EFFORTS MADE BY THE PETITIONER [efforts_made] That the Respondent has not returned to the matrimonial home and has not resumed cohabitation with the Petitioner. 6. That there is no legal ground why the relief sought should not be granted, and there has been no collusion or connivance between the parties in the presentation of this petition. 7. That the Petitioner is willing and ready to receive the Respondent back into the matrimonial home, to discharge all marital obligations, and to maintain and provide for the Respondent. 8. That this Hon'ble Court has territorial jurisdiction to entertain and try the present petition under Section 19 of the Hindu Marriage Act, 1955 for the following reason: [jurisdiction_basis] 9. That the details of any other proceedings between the parties, pending or decided, are as follows: [other_proceedings] PRAYER It is therefore most respectfully prayed that this Hon'ble Court may be pleased to: (a) Pass a decree of restitution of conjugal rights under Section 9 of the Hindu Marriage Act, 1955, directing the Respondent to resume cohabitation with the Petitioner and to return to the matrimonial home; (b) Award the costs of this petition; and (c) Pass such other orders as this Hon'ble Court may deem just and proper. AND FOR THIS ACT OF KINDNESS, THE PETITIONER SHALL EVER PRAY. Place: ______________ Date: [petition_date] [petitioner_name] PETITIONER Through ______________________ ADVOCATE FOR THE PETITIONER VERIFICATION I, [petitioner_name], the Petitioner above named, verify that the contents of paragraphs 1 to 9 of this petition are true to my personal knowledge, except paragraph(s) ______, which are based on information received and believed by me to be true, and that nothing material has been concealed. Verified at ______________ on [petition_date]. [petitioner_name] ENCLOSURES 1. Affidavit of the Petitioner in support of the petition 2. Proof of marriage 3. Copies of letters, messages or notices asking the Respondent to return, if any

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DRAFTING NOTES

  • Under the Explanation to Section 9, once the withdrawal is shown, the burden of proving a reasonable excuse for it lies on the spouse who has withdrawn.
  • If there is no restitution of conjugal rights for one year or more after a decree under Section 9, either party may seek divorce on that ground under Section 13(1A)(ii) of the Act.
  • Section 19 allows the petition, among other grounds, in the court within whose local limits the marriage was solemnised, the respondent resides, the parties last resided together, or the wife resides where she is the petitioner. State the ground that is true in paragraph 8.
  • Fill in paragraph 9 or write "No other proceedings" there. Cases such as maintenance or domestic violence complaints must be disclosed.
  • In the verification, list any paragraph based on what you were told rather than your own knowledge. If there is none, strike out the exception.

संयुग्म अधिकार याचिका की बहाली: यह क्या है

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत एक पति या पत्नी द्वारा वैवाहिक अधिकारों की बहाली याचिका दायर की जाती है, जिसके पति या पत्नी ने बिना किसी उचित बहाने के वैवाहिक घर छोड़ दिया हो। यह अदालत से पति या पत्नी को वापस आने और एक साथ रहने का निर्देश देने के लिए एक डिक्री के लिए कहता है, और यह शादी, वापस लेने की तारीख, सुलह करने के लिए किए गए प्रयासों और पति या पत्नी को वापस प्राप्त करने के लिए याचिकाकर्ता की इच्छा को दर्ज करता है।

जब आपको इस दस्तावेज़ की आवश्यकता होती है

  • एक पत्नी या पति ने वैवाहिक घर छोड़ दिया है और बार-बार अनुरोध करने के बावजूद लौटने से इनकार कर दिया है।
  • याचिकाकर्ता वास्तव में शादी को बचाना चाहता है और पारिवारिक प्रयासों के विफल होने के बाद उसे अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
  • एक जीवनसाथी माता-पिता के घर चला गया है और बिना कोई कारण बताए सभी संपर्क बंद कर दिए हैं।
  • याचिकाकर्ता एक औपचारिक रिकॉर्ड चाहता है कि दूसरे पति/पत्नी ने वैध औचित्य के बिना वापस ले लिया।

इसमें क्या शामिल है

  • अदालत, याचिका संख्या, और याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के नाम और पते।
  • हिंदू संस्कारों के तहत शादी की तारीख और स्थान, और बाद में दोनों पक्ष एक साथ रहते थे।
  • तथ्य, और वह तिथि जिससे प्रतिवादी बिना किसी उचित बहाने के याचिकाकर्ता की सोसायटी से अलग हो गया।
  • प्रत्यर्थी को लौटने के लिए मनाने के लिए किए गए प्रयास, और प्रत्यर्थी को प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ता की तैयारी।
  • कोई मिलीभगत और क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र पर बयान, पक्षों के बीच किसी भी अन्य कार्यवाही का विवरण, और एक डिक्री और लागत के लिए प्रार्थना।
  • याचिकाकर्ता द्वारा व्यक्तिगत ज्ञान को जानकारी से अलग करने का सत्यापन, और सहायक हलफनामे सहित संलग्नकों की एक सूची।

इसे कैसे भरें, हस्ताक्षर करें और उपयोग करें

  1. अपने जीवनसाथी को वापस लाने के अपने प्रयासों को दर्ज करें, जैसे संदेश, पत्र, कानूनी नोटिस या परिवार के बड़ों के साथ बैठकें।
  2. शादी के विवरण, वापस लेने की तारीख, तथ्यों और किए गए प्रयासों को सच्चाई और विशिष्ट रखते हुए भरें।
  3. याचिका, सत्यापन और सहायक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करें, और याचिका पर अपने वकील द्वारा हस्ताक्षर करें जहाँ आपका प्रतिनिधित्व किया जाता है।
  4. परिवार न्यायालय या जिला न्यायालय में फाइल करें जहाँ विवाह संपन्न किया गया था, जहाँ प्रतिवादी रहता है या जहाँ आप आखिरी बार एक साथ रहे थे।
  5. प्रत्यर्थी को सूचना दें और यदि संदर्भित किया जाता है तो परामर्श या मध्यस्थता में भाग लें।
  6. वापस लेने और अपने प्रयासों पर साक्ष्य का नेतृत्व करें; यदि कोई डिक्री पारित की जाती है, तो एक प्रमाणित प्रति रखें और बाद में संदर्भ के लिए तारीख को नोट करें।

संलग्न करने या रखने के लिए दस्तावेज़

  • विवाह प्रमाण पत्र, विवाह कार्ड या फोटो
  • जीवनसाथी को वापस आने के लिए कहने वाले संदेशों, पत्रों या कानूनी नोटिस की प्रतियां
  • अधिकार क्षेत्र के लिए अंतिम साझा निवास का प्रमाण
  • प्रत्यर्थी का पता प्रमाण

इसके पीछे का कानून

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 एक पति या पत्नी को क्षतिपूर्ति की डिक्री लेने की अनुमति देती है जब दूसरा बिना किसी उचित बहाने के अपनी सोसाइटी से अलग हो गया हो। एक बार जब याचिकाकर्ता निकासी दिखाता है, तो एक उचित बहाना साबित करने का बोझ उस पति या पत्नी पर पड़ता है जो चला गया। अदालत को संतुष्ट होना चाहिए कि बयान सही हैं और इनकार करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत पति या पत्नी को शारीरिक रूप से लौटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है, लेकिन अगर एक साल के लिए डिक्री का पालन नहीं किया जाता है, तो कोई भी पक्ष धारा 13 (1ए) (ii) के तहत तलाक की मांग कर सकता है। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 में भी ऐसा ही उपाय है।

बचने के लिए आम गलतियाँ

  • वैवाहिक जीवन को फिर से शुरू करने का कोई वास्तविक इरादा नहीं रखते हुए केवल एक रणनीति के रूप में दायर करना, जिसे अदालतें अक्सर मामले के संचालन से नोटिस करती हैं।
  • दाखिल करने से पहले जीवनसाथी को वापस लाने के वास्तविक प्रयासों का दस्तावेजीकरण नहीं करना।
  • ऐसी घटनाओं को छिपाना जो जीवनसाथी को एक उचित बहाना देती हैं, जैसे कि क्रूरता की शिकायतें, जो याचिका को विफल कर सकती हैं।
  • क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के बिना अदालत में दायर करना।

संयुग्म अधिकार याचिका की बहाली: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगर मेरा जीवनसाथी क्षतिपूर्ति आदेश का पालन नहीं करता है तो क्या होगा?

अदालत पति या पत्नी को शारीरिक रूप से दूसरे के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। यदि डिक्री के बाद एक साल या उससे अधिक समय तक वैवाहिक अधिकारों की कोई बहाली नहीं होती है, तो पति या पत्नी उस आधार पर तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं। रखरखाव की कार्यवाही में गैर-अनुपालन भी प्रासंगिक हो सकता है।

क्या एक पत्नी अपने पति के खिलाफ धारा 9 याचिका दायर कर सकती है?

हां. धारा 9 पति या पत्नी दोनों के लिए उपलब्ध है। एक पत्नी जिसके पति ने उसे छोड़ दिया है, या जिसे जाने के लिए कहा गया है और जिसे वापस जाने की अनुमति नहीं है, वह उसी तरह से क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन कर सकती है जैसे एक पति कर सकता है।

अलग रहने का उचित बहाना क्या है?

अदालतों ने क्रूरता, दहेज की मांग, सुरक्षा के लिए खतरे और दूसरे पति या पत्नी के दुराचार को उचित बहाने के रूप में स्वीकार किया है। प्रत्येक मामला अपने तथ्यों पर बदल जाता है। यदि प्रतिवादी एक उचित बहाना साबित करता है, तो याचिका खारिज कर दी जाती है।

क्या प्रतिवादी धारा 9 के मामले के दौरान भरण-पोषण का दावा कर सकता है?

हां. हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, पर्याप्त स्वतंत्र आय के बिना पति या पत्नी अंतरिम रखरखाव और मुकदमेबाजी के खर्चों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि मामला लंबित है। एक पत्नी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के तहत अलग से भरण-पोषण का भी दावा कर सकती है।

अंतिम अद्यतन 11 अक्टूबर 2026।

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